First blog post

This is your very first post. Click the Edit link to modify or delete it, or start a new post. If you like, use this post to tell readers why you started this blog and what you plan to do with it.

post

Advertisements

आवाज़ भी होती है ,

खामोशियों में 


और 


खामोशियाँ भी होती है, 

लहरों में ,


“बस एक एहसास चाहिए”

..

एहसास दिल तक छू जाए

मोहब्बत में देखा है ,


लेकिन बोल न सका ।


अश्कों को अक्सर 

पानी में मिलते देखा है ,


लेकिन छिपा न सका ।


गुमनाम होकर खुद को 

ढूंढते देखा है,


लेकिन खोज न सका।


लोगों को यूं ही 

परेशान होते देखा है 


लेकिन समझ न सका। 

अश्क़िया

मोहब्बत भी थी, ख्वाहिशें भी थीं
बस इज्ह़ार न हुआ।

अब्सार अश्क में थी, आशुफ़्ता भी थी

बस ज़ाहिर न हुआ।

ज़मीर में आग जलती भी थी, बुझती भी थी

बस तड़प न हुई।

दीवारें भी गिरी, ज़ख्म भी लगे

बस एहसास ना हुआ।

अश्क मोहब्बत में थी, ज़मीर पत्थर सा था

बस पहचान न हुई।

वैश्या बनती औरतों का दर्द

क्यों औरतों को उनका हक नही दिया जाता ?
क्यों उनको शादी के बाद पत्नी होने का दर्जा नही दिया जाता ?

क्यों मासूम बच्चियों को शिकार बनाया जाता है????
ऐसे में ही औरतें खुद से टूट जाती हैं ,

जब उनका एक छोटा मासूम सा बच्चा भूखा रहता है,

और माँ को कई दिनों तक खाना नसीब नही होता,

ऐसे में ही औरतों को  नरक के गड्ढ़े में खुद को जबरन ढकेलना पड़ जाता है।
जहां उसे अपने जिस्म को तोड़कर, अपने उम्मीदों को छोड़कर,

अपने और अपने बच्चों के लिए खुद को बेचना पड़ जाता है,

और उस नरक को ही अपना घर बनाना पड़ जाता है,
एक साधारण औरत से एक वैश्या की ज़िंदगी जीनी पड़ती है ।
क्यों औरतों को उनका हक नहीं दिया जाता है?????

😃

बहुत बुरा लगता है खुद को,

जब कोई अपना अजनबी लगने लगता है।

अजीब लगता है उसके साथ रहना,

अजीब लगने लगता है उससे बाते करना,

बहुत बुरा लगता है अब .. खुद को उसके साथ देखकर😑

ऐसा लगता है मानो.. कि मैं किसी पराये के साथ हूं।

अब पहले जैसा अपनापन नहीं रहा…..

जिंदगी में किसी के साथ हद से ज्यादा लगाव नहीं रखना चाहिए।

सभी चीजें जिंदगी में एक सीमित दायरे तक अच्छी लगती है।